नाग पंचमी पर राहु- केतु होंगे प्रसन्न, मालामाल होने का बन रहा योग

nag panchami 2021 rahu ketu ka upay

Nag Panchami 2021 : अगर आपकी कुण्डली में कालसर्प दोष बना हुआ है। अंगारक दोष बना है, चंडाल दोष बना है या ग्रहण दोष बने हुए हैं अथवा पितृदोष बना हुआ है, ये सभी दोष राहु-केतु के कारण ही बनते हैं।

अगर आपको सांपों के सपने आते हैं या आपके घर में बार-बार सांप आते हैं अथवा आपको सांपों से डर लगता है तो 13 अगस्त 2021 को शुक्रवार के दिन नाग पंचमी का त्योहार आने वाला है। वहीं अगर आप इस दिन कुछ उपाय कर लेते हैं तो आप राहु-केतु के द्वारा उत्पन्न हुए इन दोषों को दूर कर लोगों और राहु-केतु दोनों ही आपसे प्रसन्न हो जाएंगे। क्योंकि राहु को सांप का मुख कहा जाता है और केतु को सांप की पूंछ माना जाता है।

कौन नाग किस ग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं?

इसका उत्तर है- सूर्य का अनंत नाग, चंद्रमा का वासुकि, भौम का तक्षक, बुध का कर्कोटक, वृहस्पति का पद्म, शुक्र का महापद्म और शनि ग्रह का रूप हैं कुलिक व शंखपाल। भगवान कृष्ण की कुंडली देखने वाले गर्ग ऋषि ने शेषनाग से ही ज्योतिष विद्या सीखी थी। इस दिन घर के दरवाजे के दोनों ओर गोबर से नाग का चित्र बनाते हैं और कथा कहते हुए पूजा की जाती है।

कथा है- मणिपुर के एक किसान से जब गलती से नाग के तीन बच्चों के प्राण चले जाते हैं, तो नागिन किसान के सारे परिवार को डस लेती है। जब उसकी बची हुई पुत्री को डसने आती है, तो वह कन्या उसे दूध का कटोरा देती है। वह उसकी दया भावना से प्रसन्न होकर सारे परिवार को पुनर्जीवित कर देती है और नाग पंचमी की पूजा के माध्यम से नागों से सुरक्षित रहने का आशीर्वाद भी देती है।

आपको इस दिन नागों की पूजा करनी है। अगर आप इस दिन जीवित नाग की पूजा करें तो आप आसानी से ही इन दोषों से मुक्त हो जाएंगे।वहीं अगर आप नागदेवता की प्रतिमा अथवा उनकी किसी फोटो आदि की भी पूजा कर सकते हैं।अगर आपके घर के आसपास नाग देवता की कोई प्रतिमा बनी हुई है तो वहां पर आप जाकर नागदेवता की पूजा कर सकते हैं।वहीं आप भगवान शिव के मंदिर में बैठकर भगवान शिव की भी पूजा कर सकते हैं। क्योंकि भगवान शिव नागदेवता को अपने गले में धारण करते हैं।वहीं आप इस दिन नाग और नागिन दोनों की भी पूजा कर सकते हैं। आप इस दिन चांदी , लोहे आदि के नाग-नागिन क जोड़े की भी पूजा कर सकते हैं।

आप इस दिन दूध से नाग-नागिन के जोड़े को स्नान करवाकर अथवा गंगाजल से स्नान करवाकर या शुद्ध जल से भी उनको स्नान करवा सकते हैं।इसके बाद आप इत्र, पीला चंदन या फूल , दूधद्व घी तथा खीर और मिठाई का भी भोग लगा सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *