प्रधानमंत्री ने कहा: आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और मितानिन राष्ट्र निर्माण की अग्रणी सिपाही

रायपुर.प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ सरकार के आंगनबाड़ी केन्द्रों में द्वारा राज्य के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए कमरछठ और रक्षाबंधन जैसे लोकपर्वों के माध्यम से किए जा रहे जन-जागरण के प्रयासों की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा – ऐसे तीज-त्यौहारों को पोषण अभियान से जोड़कर छत्तीसगढ़ में एक नई मिसाल पेश की है। श्री मोदी ने आज नई दिल्लंी में वीडियो कॉन्फ्रंेसिंग के जरिए प्रदेश के दो जिलों -रायपुर और राजनांदगांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य विभाग की महिला कार्यकर्ताओं (ए.एन.एम.) और स्वास्थ्य मितानिनों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने इन महिला कर्मियों से आगंनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों और गर्भवती माताओं के लिए पोषण आहार और टीकाकरण आदि के लिए संचालित सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। प्रधानमंत्री के साथ उनका यह वीडियो वार्तालाप दोनों जिला मुख्यालयों के कलेक्टोरेट स्थित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) के कक्ष में हुआ।
श्री मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्थानीय तीज-त्यौहारों को राष्ट्रीय पोषण अभियान से जोड़ने और जनता को जागरूकता का संदेश देने का जो प्रयोग किया जा रहा है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है और अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक है। प्रधानमंत्री ने कहा – आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएनएम) और स्वास्थ्य विभाग की मिनानिन वास्तव में राष्ट्र निर्माण की अग्रणी सिपाही हैं। प्रधानमंत्री को जब वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में बताया गया कि राज्य में बच्चों और महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए महिला एवं बाल विकास द्वारा सुपोषण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत महिलाओं के प्रमुख लोक पर्व ’कमरछठ’ और ‘रक्षाबंधन’ को भी जोड़ा गया है। राज्य के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों में गर्भवती माताओं को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन देने के लिए महतारी जतन योजना भी चलाई जा रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में राजनांदगांव जिले के ग्राम उपरवाह की आगंनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शांति साहू ने प्रधानमंत्री को बताया कि छत्तीसगढ़ की माताएं अपने बच्चों के स्वस्थ्य और सुदीर्घ जीवन के लिए करमछठ का व्रत रखती हैं। इस मौके पर अन्य पौष्टिक व्यंजनों के साथ कई तरह की भाजियों को भी थाली में परोसा जाता है। यह एक स्वास्थ्यवर्धक थाली होती है। ग्राम उपरवाह के आंगनबाड़ी केेन्द्र में इस प्रयोग को अच्छी सफलता मिली है।
श्रीमती साहू ने प्रधानमंत्री को यह भी बताया कि रक्षाबंधन के त्यौहार को भी राष्ट्रीय पोषण अभियान से जोड़ा गया है। उपरवाह सहित अन्य कई आंगनबाड़ी केन्द्रों में राखी बांधने की तर्ज पर ‘पोषण रक्षा सूत्र’ बांधने का भी प्रयोग शुरू किया गया है। पोषण रक्षा सूत्र बांधकर माताओं को यह संकल्प दिलाया गया कि वे अपने बच्चों को पौष्टिक आहार का सेवन नियमित रूप से करवाएंगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर संपर्क करते हुए ग्रामीण परिवारों से चर्चा की जाती है और उन्हें बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए उनके खान-पान में पौष्टिकता के बारे में सलाह दी जाती है। इससे ग्राम उपरवाह में दस कुपोषित बच्चे कुपोषण के दायरे से बाहर आ गए। प्रधानमंत्री को यह प्रयोग काफी पसंद आया। उन्होंने ताली बजाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शांति साहू को बधाई दी और कहा कि यह एक अद्भुत प्रयोग है। श्री मोदी ने कहा कि वर्षों पहले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने गणेश चतुर्थी के महापर्व को जनता से सीधे जोड़कर देश में सार्वजनिक गणेश उत्सवों की शुरूआत की थी। उसी तरह छत्तीसगढ़ में कमरछठ जैसे लोकपर्व को पोषण अभियान से जोड़ने का यह प्रयोग पूरे देश के लिए एक प्रेरणा दायक मिसाल है। श्री मोदी छत्तीसगढ़ के आंगनबाड़ी केन्द्र की इस पहल से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने आज की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मध्यप्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से बातचीत में भी इसका उदाहरण दिया।
प्रधानमंत्री ने आज ही छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य मितानिनों से भी उनके केन्द्रों से संबंधित गांवों में कुपोषण की स्थिति आदि के बारे में जानकारी ली। आरंग विकासखण्ड के ग्राम खौनी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती केजा चन्द्राकर, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएनएम) श्रीमती उर्मिला देवांगन और स्वास्थ्य मितानिन श्रीमती देवकी यादव ने प्रधानमंत्री से बातचीत की। प्रधानमंत्री को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती केजा चन्द्राकर ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण अभियान के सुचारू संचालन के लिए उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एक विशेष मोबाइल एप्प सहित स्मार्ट फोन दिया गया है। इससे उनका काम काफी आसान हो गया है। पहले हर आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों और गर्भवती माताओं से संबंधित ग्यारह प्रकार के रजिस्टरों को भरना पड़ता था। ऐसे में बच्चों का वजन लेकर कुपोषण का प्रतिशत और पोषण स्तर का ग्राफ बनाने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब सरकार से मिले स्मार्ट फोन और उसमें मोबाइल एप्प से उनका काम काफी सरल हो गया है। पहले अपने क्षेत्र के परिवारों से घरों में सम्पर्क के दौरान उनसे मौखिक जानकारी लेकर रजिस्टरों में दर्ज करते थे। अब स्मार्ट फोन लेकर जाते हैं और उन्हीं के सामने मोबाइल एप्प में सारी जानकारी दर्ज कर लेते हैं। इन महिला कार्यकर्ताओं ने अपना स्मार्ट फोन भी दिखाया। प्रधानमंत्री ने इसे आंगनबाड़ी केन्द्रों में डिजिटल भारत अभियान की एक अच्छी उपलब्धि बताया। उन्होंने रायपुर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद कहा – आप सभी के द्वारा अपने केन्द्रों में माताओं और बच्चों की सेहत और उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए स्मार्ट फोन और मोबाइल एप्प जैसी नई तकनीक का उपयोग करते हुए डिजिटल भारत अभियान को मजबूती दी जा रही है। इस अभियान में भी आपकी अहम भूमिका है। मैं आप सभी को नमन करता हूं।

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