सपा-बसपा गठबंधन के सबसे बड़े मुस्लि’म नेता ने दिया बड़ा बयान-‘सपा यूपी में..’

लखनऊ: महागठबंधन बनने के बाद भी सपा-बसपा को लोकसभा चुनाव में कोई बहुत बड़ी कामयाबी नहीं मिली है. देखा जाए तो सपा की पिछली बार की तरह इस बार भी 5 सीटें हैं लेकिन पार्टी अपनी परंपरागत सीटें गंवा बैठी है वहीँ कुछ नई सीटें पार्टी जीत गई है. करारी हार के बाद भी सपा के नेता ये मानते हैं कि वो जनता की नब्ज़ को फिर से पकड़ लेंगे और विधानसभा चुनाव आते आते पार्टी फिर से ताक़त बन उभरेगी.

इस बारे में सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान ने एक अखबार से बातचीत की है. आज़म अपनी रामपुर सीट बचाने में कामयाब रहे. वो बड़े मार्जिन से लोकसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं. एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में आज़म ने कहा,”सपा और बसपा का गठबंधन 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा और समाजवादी पार्टी यूपी के चुनाव में फिर से जोरदार वापसी करेगी,इस लोकसभा चुनाव में हम क्यों हारे,मैं ये बात समझ ही नहीं पा रहा हूं कि आखिर हुआ क्या?कुछ बात समझ में नहीं आती,क्या हुआ,कुछ अक्ल काम नहीं कर रही है.क्या वोटरों के मन में एकदम से इतना बड़ा बदलाव आया कि उन्होंने सबकुछ बदल दिया,ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ.जबकि यूपी में ना तो भाजपा के पक्ष में कोई माहौल था ना ही कोई बड़ी लहर थी.हम तो बस इस परिणाम से हैरान हैं.”

आजम खान से जब इस बारे में पूछा गया कि क्या समाजवादी पार्टी को बीएसपी का वोट ट्रांसफर नहीं हुआ तो उन्होंने कहा,”मेरा मानना है कि जब तक दोनों पार्टियों के जिम्मेदार लोग साथ बैठकर इसपर गहराई से चर्चा नहीं करते,तब तक हम इस बारे में कुछ नहीं कह पाएंगे।किसी चुनाव में जाति का कोई संयोजन नहीं होता, बल्कि वोटों का संयोजन होता है.इस चुनाव में ऐसी कई सीटें हैं,जहां हम महज 15-20 हजार वोटों के अंतर से हारे।हमने कुछ ऐसी सीटें भी खो दीं,जो परंपरागत रूप से हमें जीतनी चाहिए थीं। हम प्रदेश की एक बड़ी पार्टी हैं और इस चुनाव में हमें झटका लगा है।लेकिन आप देखिए कि पहले हमारे पास पांच सीटें थीं और आज भी हमारे पास 5 सीटें हैं।महागठबंधन में बीएसपी को 10 सीटों पर जीत मिली हैं।”

आज़म ने कहा कि ये सपा-बसपा का गठबंधन आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कायम रहेगा।ऐसा कोई कारण नहीं है,जिससे इस गठबंधन पर कोई आंच आए।अखिलेश यादव और मायावती के बीच भी किसी तरह का कोई मतभेद नहीं था,दोनों ने चुनाव में काफी मेहनत भी की।यहां तक कि सीटों के बंटवारे को लेकर भी दोनों में किसी तरह का कोई विवाद नहीं था।

उन्होंने कहा,दोनों नेताओं ने पूरे चुनाव के दौरान एक दूसरे की बराबर मदद की।ईमानदारी से कहूं तो मुझे शुरुआत में यह उम्मीद भी नहीं थी कि गठबंधन इतने अच्छे संबंधों के साथ चलेगा। मायावती और अखिलेश यादव ने इस गठबंधन को चलाने के लिए ईमानदारी से पूरी कोशिश की है।मैंने अखिलेश यादव से कहा है कि इन कठिन परिस्थितियों में मैं पूरी तरह से उनके साथ हूं।हम फिर से लड़ेंगे। रहना होगा तबीयत को कलप संग रोज,बहलते बहलते बहल जाएगी।’

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